डरा हुआ है मन, क्योंकि तुम हो नाजुक..मैं अनजान हूँ..
मेरा अंश हो...पर मेरी आँखों से दूर हों...
सहेजती हूँ मैं तुमको,हर क्षण!!
कहती हूँ तुमसे बहुत कुछ... करनी बहुत सी बातें हैं... पर जब तुम साथ होगे तो वो कर लुंगी... मन में प्रश्न बहुत सारे ...पास होगे तो पूछ लुंगी!!!
आना,मैं तुम्हारी ऊँगली पकड़कर दुनिया फिर से देखूंगी... साथ चलूंगी दूर तलक फिर सपने तेरे सहेजुंगी!!
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